Vanshidhar ki Leela : Ek Khand Kavyaa

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Description

श्रीमद्भागवत का इस अल्पज्ञानी ने जो कुछ अध्ययन फलस्वरूप अपने जीवन में, संसार के बारे में, प्रकृति के बारे में जो भी देखा है, जो भी अनुभव किया है और जो कुछ भी अपनी अल्प बुद्धि द्वारा मेरी समझ में आया है उसको लिपिबद्ध करने का प्रयास किया है। हे सर्वशक्तिशाली, सर्वान्तरयामी, सर्वश्रेष्ठ, सर्वव्यापी श्रीकृष्ण मेरी घृष्टता, मेरी गलतियों को क्षमा करियेगा। यह शरणागत सेवक आपके श्री चरणों की शरण में है।

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