SAMWAD

160

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Description

हिंदी कहानी पर जब भी कहीं कोई चर्चा होती है तोसबसे पहले जो नाम सामने आता है वो है मुंशी प्रेमचद।सौ से अधिक वर्षों के बाद आज भी उनकी कहानियाँ वैसी की वैसी ही ताज़ी बनी हुयी है , जैसी तब रही होंगी। कारण, न तो हमारा समाज बदला है और न ही इसकी कुरीतियाँ।अतः जब भी इन कुरीतियों के विरूद्ध कहीं कोई आवाज मुखरित होती है तो उस आवाज़ को सहारा देती हैं मुंशी प्रेमचद की कहानियाँ। मुंशी प्रेमचद की कहानियाँ अर्थपूर्ण, रोचक, घटना प्रधान एव दर्शक को बांध ल ेने की क्षमता से भरपूर हैं। इन कहानियों के पात्र हमारे समाज में विचरण करने वाले हाड़-मांस के पुतल हैं जो सभी प्रकार के गुणों एव दुर्गुणों से ओत-प्रोत हैं।

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